महात्मा गाॅधी चित्रकूट ग्रामोदय विष्वविद्यालय में बेबीनार
महात्मा गाॅधी चित्रकूट ग्रामोदय विष्वविद्यालय में बेबीनार
चित्रकूट, 05 जून 2020। महात्मा गाॅधी चित्रकूट ग्रामोदय विष्वविद्यालय के ग्रामीण विकास एवं व्यवसाय प्रबंधन संकाय के तहत ’’रिवाइविंग लोकल सेल्फ रिलायन्स: चैलेन्जेज आफ रूरल डेवेलपमेंट इन इन्डिया आफ्टर कोविड -19 पैनाडेमिक’’ विषय पर एक वेबिनार संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम का उद्घाटन कुलपति प्रो. नरेषचन्द्र गौतम के अध्यक्षीय उद्वबोधन के साथ हुआ। इस अवसर पर कुलपति प्रो. गौतम ने कहा कि कोविड 19 ने हमारे लिए अनेक अवसरों का सृजन किया है। षिक्षा जगत में नई तकनीको एवं ग्रामोपयोगी कौषलो का समवेष कर षिक्षा को गुणवत्ता पूर्ण बनाया जा सकता है। उन्होंने इस आयोजन के माध्यम से षिक्षको और शोधार्थियों को मिले नवीन ज्ञान को अपनाने का आवाहन करते हुये कहा कि नवाचारों को आत्मसात करने में कतई संकोच नही करना चाहिये। उपलब्ध ज्ञान को विज्ञान और तकनीक के माध्यम से सर्वग्राहय बनाना अच्चे षिक्षक और शोधार्थी का गुण होता है। उन्होने नानाजी के समाज षिल्पी कार्यक्रम की सराहना करतेे हुये विष्वविद्यालय द्वारा 2015 से संचालित किये जा रहे मुख्यमंत्री सामुदायिक विकास कार्यक्रम के प्रयोग को इस लक्ष्य की प्राप्ति में सहायक बताया।
अवधेष प्रताप सिंह विष्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. अरूण दिवाकर नाथ वाजपेई जी ने ग्रामीण विकास के मापदण्डों को स्थापित करने में परम श्रद्धेय नानाजी देषमुख द्वारा चित्रकूट में किए गये प्रयोंगों को महत्वपूर्ण एवं प्रेरणास्पद बताया। प्रो0 वाजपेई ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में स्थापित इस विष्वविद्यालय के कुलपति प्रो. गौतम के नेतृत्व में हो रहे वैज्ञानिक नवाचार प्रंसनीय है। उन्होंने इस अवसर पर कौषल विकास के कार्यक्रमों को विषेष उपयोगी बताते हुये इस सफल आयोजन की सराहना की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. गिरीष त्रिपाठी, अध्यक्ष उत्तर प्रदेष उच्च षिक्षा परिषद ने महात्मा गांधी के ग्राम गणराज्य की कल्पना का विस्तार से वर्णन किया। उन्होने ग्रामीण आत्मनिर्भरता के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्रमोदी जी द्वारा संचालित आत्मनिर्भर भारत कार्यक्रम के महत्वपूर्ण प्रावधानों को बताते हुए इसे एम एस एम ई के लिए संजीवनी बताया।
इस अवसर पर प्रबन्धन संकाय के अधिष्ठाता डाॅ. अमरजीत सिंह, ने कार्यक्रम के औचित्य एवं प्रासंगिकता पर प्रकाष डालते हुये कहा कि यह आयोजन मुख्य रूप से ग्रामीण आत्मनिर्भरता को बढाकर ग्रामीण विकास को गति प्रदान करने वाले सुझावों को प्राप्त करने के लिये आयोजित किया गया है। ग्रामीण आत्मनिर्भरता से नगरीय आत्म निर्भरता प्राप्त होगी और नगर वैष्विक आवष्यकताओं के अनुरूप माॅग की पूर्ति करने में सक्षम बनेगें।
तकनीकी सत्रों के विषेषज्ञ के रूप में प्रोफेसर मनीष शर्मा, उच्च षिक्षा के उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल ने कहा कि स्थानीय संसाधनो से गुणवत्ता युक्त उत्पादों का इस प्रकार निर्माण किया जाय कि वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनका विपणन स्वतः होने लगे। जयपुर विष्वविद्यालय के समाज विज्ञान संकाय के संकायाध्यक्ष प्रोफेसर विजयवीर सिंह, एवं नागपुर विष्वविद्यालय के प्रो0 विनायक देषपाण्डेय ने भी अपने महत्वपूर्ण विचार रखें।
इस अवसर पर प्रो0 जे0पी0 मिश्रा, महाराजा महाविद्यालय, छतरपुर, डाॅ. सविता जैन, दमोह, प्रो. आर.एस. विसारिया, रामा विष्वविद्यालय, कानपुर, डाॅ. गोविन्द सिंह डाॅ. सुमन गोयल, श्री विवेक उपाध्याय, डाॅ0 अंजली शर्मा, हिमाचंल, डाॅ0 अनिल ठाकुर, झारखण्ड विष्विद्यालय, डाॅ. दिब्या, अवध विष्विद्यालय, फैजाबाद, प्रो0 ऊषा खाद्य प्रोद्योगिकी भोपाल, एवं अन्य 473 गणमान्य प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
प्रो. विजय सिंह परिहार, प्राध्यापक अर्थषास्त्र ने समापन सत्र् का संचालन किया एवं धन्यवाद ज्ञापन करते हुये कहा कि चित्रकूट भगवान राम की तपस्थली है, जहाॅ विचार मंथन से निकला यह अमृत समस्त विष्व के लिये निष्चय ही कल्याणकारी साबित होगा।
#Shubham Rai Tripathi
#thechitrakootpost
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