कोरोना के बढ़ रहे संक्रमण से हमारे सामने अब और भी ज्यादा चुनौतियां - अभय महाजन



जरूरतमंद परिवारों तक राशन पहुंचा रहा दीनदयाल शोध संस्थान

कोरोना के बढ़ रहे संक्रमण से हमारे सामने अब और भी ज्यादा चुनौतियां - अभय महाजन

चित्रकूट, 7 मई 2020।  वैश्विक महामारी कोरोना ने अब हर वर्ग के व्यक्ति की कमर तोड़कर रख दी है। खास तौर पर गरीब और मजदूर वर्ग को लाॅकडाउन ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। देश में डेली गड्ढा खोदकर पानी पीने वालों की संख्या अधिक है। अभी तक 21 दिन का लॉकडाउन, फिर 19 दिन का लाॅकडाउन और अब लाॅकडाउन के पार्ट-3 की शुरुआत ने गरीब वर्ग के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है। इस लाॅकडाउन में भले ही बंदिसें कम और राहत ज्यादा है फिर भी काम शून्य के बराबर है।

ऐसे हालात में शासन-प्रशासन के साथ सामाजिक संस्था और देश के संकट काल में कंधे से कंधा मिलाकर समाज के हर वर्ग की चिंता करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता गरीबों और निराश्रितों के लिए देवदूत बनकर सेवा कार्य में लगे हुए हैं।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानव दर्शन के विचारों को मूर्त रूप देते हुए समाज के निचली पंक्ति के व्यक्ति की चिंता करने वाले भारत रत्न नानाजी देशमुख का प्रकल्प दीनदयाल शोध संस्थान भी आपदाकाल में अपना समाज धर्म निभा रहा है।

दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा जरूरतमंद परिवारों जिसमें गरीब एवं निराश्रित लोगों को राशन वितरण के साथ ग्रामीण स्तर पर संस्थान के सहयोगी कार्यकर्ताओं के द्वारा जन जागरूकता का कार्य भी किया जा रहा है, साथ ही फसल कार्य के दौरान सामाजिक डिस्टेंसिंग को बनाए रखने व घर पर ही रहने सहित लाॅकडाउन का पालन करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

लाॅकडाउन के कारण जरूरतमंद परिवारों को जीवन जीने के लिए इस संकट के समय तात्कालिक सहयोग के रूप में राशन सामग्री का वितरण किया जा रहा है एवं कोरोना महामारी के संक्रमण को रोकने के लिए मास्क का वितरण भी किया जा रहा है। 

दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन अपने कार्यकर्ताओं की टोली के साथ रोजाना चित्रकूट में श्री कामदगिरि परिक्रमा मार्ग एवं जंगलों के विभिन्न स्थानों पर जहां बहु संख्या में बंदर एवं जीव-जंतुओं के साथ गोवंश है, वहां सेवा कार्य करते हुए भोजन प्रसाद की चिंता कर रहे हैं।

इसके अलावा चित्रकूट क्षेत्र के दूरदराज जंगलों में कई ऐसे दुर्गम स्थान है, ये स्थान आम आदमी की पहुंच से काफी दूर है। ऐसे जंगलों की खोह-कंदराओं में अपना आश्रम बनाकर तपस्या कर रहे साधु-संतों को राशन सामग्री भेजी जा रही है। आश्रमों में संतों की आवश्यकता अनुसार उनका स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जा रहा है।
लाॅकडाउन हो जाने के कारण जंगलों में कई साधु संन्यासियों ने डेरा डाल रखा है। इन साधु संन्यासियों के बारे में जैसे ही दीनदयाल शोध संस्थान को पता चला तो संस्थान के संगठन सचिव श्री अभय महाजन अपने कार्यकर्ताओं को साथ लेकर समाज के सहयोग से इन साधु संतों को राशन उपलब्ध करवा रहे हैं। कार्यकर्ताओं ने शुरू में दो-तीन दिन पूरी तरह लॉक डाउन का पालन किया, फिर स्थानीय प्रशासन से अनुमति लेकर संतों की सेवा में जुट गए। इस काम के लिए दीनदयाल शोध संस्थान के कार्यकर्ताओं को कई बार तो कई किलोमीटर की दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। यहां तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है लेकिन घने जंगलों, दुर्गम पहाड़ों और ऊंचे-नीचे चट्टानी रास्तों को पार कर अभय महाजन और उनकी टीम इन संन्यासियों तक राशन एवं फलाहार का सामान लेकर पहुंच रही हैं। दीनदयाल शोध संस्थान की तरफ से जिन आश्रमों में भोजन सामग्री पहुंचायी गयी उनमें टाठी घाट आश्रम, कोटि तीर्थ, बंदरचूही, पम्पापुर और प्राचीन बांके सिद्ध आश्रम, ब्रह्मकुंड, गोविंद आश्रम प्रमुख रूप से है।

दीनदयाल शोध संस्थान के प्रकल्प उद्यमिता विद्यापीठ, जन शिक्षण संस्थान और कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से गांव-गांव में संचालित किए गए सिलाई प्रशिक्षण के ट्रेनीजों को कपड़ा उपलब्ध कराकर मास्क तैयार कराए जा रहे हैं। अभी तक लगभग 18 हजार मास्क ग्रामीण क्षेत्रों में एवं नगर में वितरित किए जा चुके हैं। इसके साथ ही हैंड सैनिटाइजर भी वितरित किए गए हैं।

संस्थान के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के द्वारा मोबाइल एवं व्हाट्सएप एडवाइजरी के माध्यम से किसानों को फसल कटाई एवं कृषि यंत्रों के प्रयोग के समय कोविड-19 से बचाव के तरीकों के साथ कृषिगत समस्याओं का समाधान भी किया जा रहा है।

दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा अपने सहयोगी कार्यकर्ताओं के माध्यम से गांव-गांव कोरोना वायरस से बचाव और सुरक्षा के उपायों के बारे में डोर टू डोर जानकारी दी जा रही है एवं दीवाल लेखन किया जा रहा है।
ऐसे ही प्रयास चित्रकूट एवं मझगवां जनपद के वे गांव जहां दीनदयाल शोध संस्थान के माध्यम से स्वावलंबन की गतिविधियां संचालित की जाती है, ऐसी  600 से अधिक ग्राम आबादियों में कोरोना महामारी से बचाव के लिए ग्राम वासियों को जागरूक किया जा रहा है। साथ ही चित्रकूट एवं मझगवां नगर के सार्वजनिक स्थलों जैसे बैंक, राशन की दुकानों और शासकीय उपक्रमों जहां ग्रामीणों का आवागमन जारी है, ऐसे स्थानों पर बैनर लगाकर, पोस्टर चिपकाकर एवं पेमप्लेट बांटकर लोगों को समझाइश दी जा रही है कि सावधानी और सतर्कता ही कोरोना से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

दीनदयाल शोध संस्थान के समाज शिल्पी दंपत्ति तथा स्वावलंबन केंद्रों के ग्राम संयोजक, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, रोजगार प्रेरक एवं संस्थान के सहयोगी कार्यकर्ता लोगों को स्वच्छता के तरीके बता रहे हैं। उनके द्वारा कहा जा रहा है कि एक दूसरे से हाथ न मिलाएं, साबुन से बार-बार हाथ धोएं, एक दूसरे के कपड़े ना पहने और अपने तोलियां रुमाल का उपयोग सभी अलग-अलग करें। इसके अलावा कृषि यंत्र जैसे अपने हंसियां, फावड़ा आदि का उपयोग स्वयं करें तथा कृषि कार्य करते समय आवश्यक दूरी बनाए रखें एवं मुंह पर मास्क या गमछा लगाएं।
कोरोना से संक्रमण के चलते ग्राम वासियों से इस अवधि में नशा मुक्ति, तंबाकू, गुटखा, पान, शराब का उपयोग न करने का भी आग्रह किया जा रहा है, ताकि गुटखा पान की पीक-थूक से संक्रमण का खतरा ना रहे। इसके अलावा दीवाल लेखन करके बताया जा रहा है कि आपकी सतर्कता से ही आप और आपका पूरा परिवार सुरक्षित होगा इसलिए सोशल डिस्टेंसिंग का पूरी तरह पालन करें और भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहें।

जिन ग्रामवासियों के पास एंड्रॉयड एवं आईफोन मोबाइल है, उनको भारत सरकार की कोरोनावायरस से बचाव की ऐप आरोग्य सेतु ऐप के गुणों से अवगत कराकर डाउनलोड कराया जा रहा है। ताकि कोरोना संक्रमण से बचाव में मदद मिल सके। यह ऐप लोगों को कोरोनावायरस संक्रमण के खतरे और जोखिम का आकलन करने में मदद करता है। यह खास ऐप आसपास मौजूद कोरोना पॉजिटिव लोगों के बारे में पता लगाने में मदद करेगा।

संगठन सचिव श्री अभय महाजन का कहना है कि सेवा करके हम लोगों पर परोपकार नहीं कर रहे हैं, बल्कि जो सेवित हैं वह हमसे सेवा लेकर हमारे ऊपर ही उपकार कर रहे हैं। सेवा हमारा समाज धर्म है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह देश में कोरोना का संक्रमण जिस गति से बढ़ रहा है, उसको देखते हुऐ हमारे सामने और भी ज्यादा चुनौतियां हैं। अब और अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। इसीलिए राष्ट्रहित में लाॅकडाउन का पालन हम सबको पूरी ईमानदारी से करना ही चाहिए। सावधानी, सजगता, सतर्कता और समझदारी ही नोबेल कोरोना वायरस से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

Shubham Rai Tripathi
#thechitrakootpost

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